अमृत ​​वेले का हुक्मनामा – 30 दसंबर 2022

सलोकु मः ३ ॥ पड़णा गुड़णा संसार की कार है अंदरि त्रिसना विकारु ॥ हउमै विचि सभि पड़ि थके दूजै भाइ खुआरु ॥ सो पड़िआ सो पंडितु बीना गुर सबदि करे वीचारु ॥ अंदरु खोजै ततु लहै पाए मोख दुआरु ॥ गुण निधानु हरि पाइआ सहजि करे वीचारु ॥ धंनु वापारी नानका जिसु गुरमुखि नामु […]

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अमृत ​​वेले का हुक्मनामा – 22 जनवरी 2026

अंग : 584 वडहंसु महला ३ ॥ इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आए ॥ गुरि राखे से उबरे होरु मरि जमै आवै जाए ॥ होरि मरि जमहि आवहि जावहि अंति गए पछुतावहि बिनु नावै सुखु न होई ॥ ऐथै कमावै सो फलु पावै मनमुखि है पति खोई ॥ जम पुरि घोर अंधारु […]

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अमृत ​​वेले का हुक्मनामा – 14 मई 2026

अंग : 742 सूही महला ५ ॥ अनिक बींग दास के परहरिआ ॥ करि किरपा प्रभि अपना करिआ ॥१॥ तुमहि छडाइ लीओ जनु अपना ॥ उरझि परिओ जालु जगु सुपना ॥१॥ रहाउ ॥ परबत दोख महा बिकराला ॥ खिन महि दूरि कीए दइआला ॥२॥ सोग रोग बिपति अति भारी ॥ दूरि भई जपि नामु मुरारी […]

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संधिआ ​​वेले का हुक्मनामा – 14 मार्च 2025

रागु सोरठि बाणी भगत कबीर जी की घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ संतहु मन पवनै सुखु बनिआ ॥ किछु जोगु परापति गनिआ ॥ रहाउ ॥ गुरि दिखलाई मोरी ॥ जितु मिरग पड़त है चोरी ॥ मूंदि लीए दरवाजे ॥ बाजीअले अनहद बाजे ॥१॥ कु्मभ कमलु जलि भरिआ ॥ जलु मेटिआ ऊभा करिआ ॥ कहु […]

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संधिआ ​​वेले का हुक्मनामा – 06 अगस्त 2026

अंग : 682 धनासरी महला ५ ॥ अउखी घड़ी न देखण देई अपना बिरदु समाले ॥ हाथ देइ राखै अपने कउ सासि सासि प्रतिपाले ॥१॥ प्रभ सिउ लागि रहिओ मेरा चीतु ॥ आदि अंति प्रभु सदा सहाई धंनु हमारा मीतु ॥ रहाउ ॥ मनि बिलास भए साहिब के अचरज देखि बडाई ॥ हरि सिमरि सिमरि […]

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संधिआ ​​वेले का हुक्मनामा – 21 जून 2026

अंग : 685 धनासरी महला ९ ॥ अब मै कउनु उपाउ करउ ॥ जिह बिधि मन को संसा चूकै भउ निधि पारि परउ ॥१॥ रहाउ ॥ जनमु पाइ कछु भलो न कीनो ता ते अधिक डरउ ॥ मन बच क्रम हरि गुन नही गाए यह जीअ सोच धरउ ॥१॥ गुरमति सुनि कछु गिआनु न उपजिओ […]

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संधिआ ​​वेले का हुक्मनामा – 5 फरवरी 2025

धनासरी महला ५ ॥ जिस कउ बिसरै प्रानपति दाता सोई गनहु अभागा ॥ चरन कमल जा का मनु रागिओ अमिअ सरोवर पागा ॥१॥ तेरा जनु राम नाम रंगि जागा ॥ आलसु छीजि गइआ सभु तन ते प्रीतम सिउ मनु लागा ॥ रहाउ ॥ जह जह पेखउ तह नाराइण सगल घटा महि तागा ॥ नाम उदकु […]

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संधिआ वेले का हुक्मनामा – 28 दसंबर 2022

सलोक ॥ राज कपटं रूप कपटं धन कपटं कुल गरबतह ॥ संचंति बिखिआ छलं छिद्रं नानक बिनु हरि संगि न चालते ॥१॥ पेखंदड़ो की भुलु तुमा दिसमु सोहणा ॥ अढु न लहंदड़ो मुलु नानक साथि न जुलई माइआ ॥२॥ पउड़ी ॥ चलदिआ नालि न चलै सो किउ संजीऐ ॥ तिस का कहु किआ जतनु जिस […]

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अमृत ​​वेले का हुक्मनामा – 19 मई 2025

अंग : 682 धनासरी महला ५ ॥ जिस कउ बिसरै प्रानपति दाता सोई गनहु अभागा ॥ चरन कमल जा का मनु रागिओ अमिअ सरोवर पागा ॥१॥ तेरा जनु राम नाम रंगि जागा ॥ आलसु छीजि गइआ सभु तन ते प्रीतम सिउ मनु लागा ॥ रहाउ ॥ जह जह पेखउ तह नाराइण सगल घटा महि तागा […]

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अमृत ​​वेले का हुक्मनामा – 2 मार्च 2023

रागु बिहागड़ा छंत महला ४ घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हरि हरि नामु धिआईऐ मेरी जिंदुड़ीए गुरमुखि नामु अमोले राम ॥ हरि रसि बीधा हरि मनु पिआरा मनु हरि रसि नामि झकोले राम ॥ गुरमति मनु ठहराईऐ मेरी जिंदुड़ीए अनत न काहू डोले राम ॥ मन चिंदिअड़ा फलु पाइआ हरि प्रभु गुण नानक बाणी […]

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