संधिआ वेले का हुक्मनामा – 06 अगस्त 2026
अंग : 682 धनासरी महला ५ ॥ अउखी घड़ी न देखण देई अपना बिरदु समाले ॥ हाथ देइ राखै अपने कउ सासि सासि प्रतिपाले ॥१॥ प्रभ सिउ लागि रहिओ मेरा चीतु ॥ आदि अंति प्रभु सदा सहाई धंनु हमारा मीतु ॥ रहाउ ॥ मनि बिलास भए साहिब के अचरज देखि बडाई ॥ हरि सिमरि सिमरि […]
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अंग : 796 बिलावलु महला ३ घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ ध्रिगु ध्रिगु खाइआ ध्रिगु ध्रिगु सोइआ ध्रिगु ध्रिगु कापड़ु अंगि चड़ाइआ ॥ ध्रिगु सरीरु कुट्मब सहित सिउ जितु हुणि खसमु न पाइआ ॥ पउड़ी छुड़की फिरि हाथि न आवै अहिला जनमु गवाइआ ॥१॥दूजा भाउ न देई लिव लागणि जिनि हरि के चरण विसारे […]
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अंग : 790 सलोक मः १ ॥ सतिगुर भीखिआ देहि मै तूं सम्रथु दातारु ॥ हउमै गरबु निवारीऐ कामु क्रोधु अहंकारु ॥ लबु लोभु परजालीऐ नामु मिलै आधारु ॥ अहिनिसि नवतन निरमला मैला कबहूं न होइ ॥ नानक इह बिधि छुटीऐ नदरि तेरी सुखु होइ ॥१॥ अर्थ: हे गुरु! तू बक्शीश करने योग्य है, मुझे […]
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अंग : 740 सूही महला ५ ॥ गुर कै बचनि रिदै धिआनु धारी ॥ रसना जापु जपउ बनवारी ॥१॥ सफल मूरति दरसन बलिहारी ॥ चरण कमल मन प्राण अधारी ॥१॥ रहाउ ॥ साधसंगि जनम मरण निवारी ॥ अम्रित कथा सुणि करन अधारी ॥२॥ काम क्रोध लोभ मोह तजारी ॥ द्रिड़ु नाम दानु इसनानु सुचारी ॥३॥ […]
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अंग : 663 धनासरी महला ३ घरु २ चउपदे ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ इहु धनु अखुटु न निखुटै न जाइ ॥ पूरै सतिगुरि दीआ दिखाइ ॥ अपुने सतिगुर कउ सद बलि जाई ॥ गुर किरपा ते हरि मंनि वसाई ॥१॥ से धनवंत हरि नामि लिव लाइ ॥ गुरि पूरै हरि धनु परगासिआ हरि किरपा ते […]
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अंग : 644 सलोकु मः ३ सतिगुर की सेवा सफलु है जे को करे चितु लाइ ॥ मनि चिंदिआ फलु पावणा हउमै विचहु जाइ ॥ बंधन तोड़ै मुकति होइ सचे रहै समाइ ॥ इसु जग महि नामु अलभु है गुरमुखि वसै मनि आइ ॥ नानक जो गुरु सेवहि आपणा हउ तिन बलिहारै जाउ ॥१॥ मः […]
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अंग : 670 धनासरी महला ४ ॥ मेरे साहा मै हरि दरसन सुखु होइ ॥ हमरी बेदनि तू जानता साहा अवरु किआ जानै कोइ ॥ रहाउ ॥ साचा साहिबु सचु तू मेरे साहा तेरा कीआ सचु सभु होइ ॥ झूठा किस कउ आखीऐ साहा दूजा नाही कोइ ॥१॥ सभना विचि तू वरतदा साहा सभि तुझहि […]
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अंग : 875 रागु गोंड बाणी रविदास जीउ की घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ मुकंद मुकंद जपहु संसार ॥ बिनु मुकंद तनु होइ अउहार ॥ सोई मुकंदु मुकति का दाता ॥ सोई मुकंदु हमरा पित माता ॥१॥ जीवत मुकंदे मरत मुकंदे ॥ ता के सेवक कउ सदा अनंदे ॥१॥ रहाउ ॥ मुकंद मुकंद हमारे […]
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अंग : 778 रागु सूही छंत महला ५ घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ गोबिंद गुण गावण लागे ॥ हरि रंगि अनदिनु जागे ॥ हरि रंगि जागे पाप भागे मिले संत पिआरिआ ॥ गुर चरण लागे भरम भागे काज सगल सवारिआ ॥ सुणि स्रवण बाणी सहजि जाणी हरि नामु जपि वडभागै ॥ बिनवंति नानक सरणि […]
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अंग : 855 बिलावलु ॥ बिदिआ न परउ बादु नही जानउ ॥ हरि गुन कथत सुनत बउरानो ॥१॥ मेरे बाबा मै बउरा सभ खलक सैआनी मै बउरा ॥ मै बिगरिओ बिगरै मति अउरा ॥१॥ रहाउ ॥ आपि न बउरा राम कीओ बउरा ॥ सतिगुरु जारि गइओ भ्रमु मोरा ॥२॥ मै बिगरे अपनी मति खोई ॥ […]
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