अमृत वेले का हुक्मनामा – 12 अक्तूबर 2026
अंग : 800
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ रागु बिलावलु महला ४ पड़ताल घरु १३ ॥ बोलहु भईआ राम नामु पतित पावनो ॥ हरि संत भगत तारनो ॥ हरि भरिपुरे रहिआ ॥ जलि थले राम नामु ॥ नित गाईऐ हरि दूख बिसारनो ॥१॥ रहाउ॥ हरि कीआ है सफल जनमु हमारा ॥ हरि जपिआ हरि दूख बिसारनहारा ॥ गुरु भेटिआ है मुकति दाता ॥ हरि कीई हमारी सफल जाता ॥ मिलि संगती गुन गावनो ॥१॥ मन राम नाम करि आसा ॥ भाउ दूजा बिनसि बिनासा ॥ विचि आसा होइ निरासी ॥ सो जनु मिलिआ हरि पासी ॥ कोई राम नाम गुन गावनो ॥ जनु नानकु तिसु पगि लावनो ॥२॥१॥७॥४॥६॥७॥१७॥
अर्थ: हे भाई! उस परमात्मा का नाम स्मरण किया कर, जो विकारियों को पवित्र बनाने वाला है, जो अपने संतों को अपने भक्तों को (संसार-समुंदर से) पार लंघाने वाला है, जो (सारे जगत में) हर जगह मौजूद है। हे भाई! उस हरि की महिमा के गीत सदा गाने चाहिए, जो पानी में है, जो धरती में है, जो (जीवों के) सारे दुख दूर करने वाला है।1। रहाउ। (हे भाई!) परमात्मा ने मेरी जिंदगी कामयाब बना दी है, (क्योंकि गुरु की कृपा से) मैं उस परमात्मा का नाम जपने लग पड़ा हूँ, जो सारे दुखों का नाश करने वाला है। (हे भाई!) विकारों से खलासी दिलाने वाला गुरु मुझे मिल गया, (इसलिए) परमात्मा ने मेरी जीवन-यात्रा कामयाब कर दी है। (अब) मैं साधु-संगत में मिल के प्रभु की महिमा के गीत गाता हूँ।1। हे (मेरे) मन! परमात्मा के नाम के ऊपर ही डोरी रख, परमात्मा का नाम माया के मोह को पूर्ण तौर पर (अंदर से) खत्म कर देता है। (हे भाई!) जो मनुष्य दुनिया के काम-काज में रहता हुआ माया के मोह से निर्लिप रहता है, वह मनुष्य परमात्मा के चरणों में मिला रहता है। (हे भाई!) जो मनुष्य परमात्मा के गुण गाता है, दास नानक उसके पैर लगता है।2।1।7।4।6।7।17।

